अल-बक़रह 286 में 'ला युकल्लिफुल्लाहु नफ़्सन इल्ला वुस्अहा' का अर्थ
वाक्यांश 'ला युकल्लिफुल्लाहु नफ़्सन इल्ला वुस्अहा' का अर्थ है कि अल्लाह किसी व्यक्ति पर उसकी क्षमता से अधिक बोझ नहीं डालता। यह आयत सूरत अल-बक़रह की 286वीं आयत का हिस्सा है और अक्सर मुसलमानों को जीवन की परीक्षाओं का सामना करते समय सब्र रखने और निराश न होने की याद दिलाती है।
इब्न कसीर की तफ़सीर के अनुसार, यह आयत अल्लाह की दया को दर्शाती है जो अपने बंदों पर उनकी सामर्थ्य से बाहर बोझ नहीं डालता। यह आयत पैगंबर के साथियों को शांत करने के लिए उतरी थी जो आयत 284 के उतरने के बाद चिंतित थे, जिसमें अल्लाह को मानव हृदय की बातों का ज्ञान है।
इंडोनेशियाई धार्मिक मामलों के मंत्रालय की तफ़सीर बताती है कि यह आयत साबित करती है कि इस्लाम एक आसान धर्म है और बोझिल नहीं। अल्लाह का न्याय इस बात से झलकता है कि अच्छे कर्मों पर इनाम मिलता है, जबकि सज़ा केवल वास्तव में किए गए बुरे कर्मों पर होती है। यह सूरत अन-निसा की आयत 28 के अनुरूप है जिसमें कहा गया है कि अल्लाह तुम पर बोझ हल्का करना चाहता है, क्योंकि इंसान कमज़ोर पैदा किया गया है।
यह आयत परीक्षाओं का सामना करते समय अल्लाह के बारे में अच्छा गुमान रखना भी सिखाती है। हर परीक्षा के साथ निकास और मदद ज़रूर होती है। एक हदीस कुद्सी में आता है, 'मैं अपने बंदे के मेरे बारे में गुमान के अनुसार हूं। अगर उसका गुमान अच्छा है, तो उसे अच्छाई ही मिलेगी।'
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