वो एहसास जब शाम में अज़ान गूंजती है...
सलाम, मैं मुसलमान तो नहीं हूं लेकिन अज़ान-खासकर मस्जिदों से प्रसारित होने वाली मग़रिब की नमाज़ का आह्वान-से बहुत गहराई तक प्रभावित हूं। कुछ शेयर करना चाहता हूं। आपने वो पुराने ऑडियो की गर्माहट भरी, चटचटाहट वाली आवाज़ सुनी है न? दक्षिण भारत में यहां कुछ लाउडस्पीकर में भी कुछ वैसा ही असर है, पर ये सिर्फ पुरानी यादों की बात नहीं है। तिलावत यानी पाठ में ही एक अलग तरह की खूबसूरती है जो मुझे अपनी ओर खींच लेती है। मैं चाहे कुछ भी कर रहा हूं, जब वो दिल को छू लेने वाले श्लोक हवा में घुलते हैं, हर बार मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। क्या कोई मुझे समझा सकता है कि मैं असल में क्या सुन रहा हूं? क्या ये उसकी मधुरता है, पाठ की शैली (तिलावत), या कुछ और गहरा? और, आमतौर पर इसे कौन पेश करता है-क्या कोई नियुक्त मुअज़्ज़िन होता है? आपके विचार सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगेगा।