शब्दों की कलाबाज़ी
सब लड़ते रहें और इसे 'युद्धविराम' कहते रहना, गैसलाइटिंग जैसा लगता है। आख़िर कब हम ये मान लें कि शांति वार्ता नाकाम हो गई?
सब लड़ते रहें और इसे 'युद्धविराम' कहते रहना, गैसलाइटिंग जैसा लगता है। आख़िर कब हम ये मान लें कि शांति वार्ता नाकाम हो गई?
समुदाय के साथ अपना दृष्टिकोण साझा करें।
नई टिप्पणी जोड़ें
टिप्पणी छोड़ने के लिए लॉग इन करें