2026 में रमज़ान: सर्दियों में बदलाव और परिवर्तन पर विचार
30 साल से ज़्यादा बाद पहली बार सर्दियों में रमज़ान का अनुभव करना काफी सुकून भरा रहा, क्योंकि रोज़े के घंटे कम हो गए हैं और एक तरह की नॉस्टैल्जिया भी महसूस हो रही है। रोज़ा रखने और आत्मचिंतन का मूल तो वही है, लेकिन रफ़्तार बदल गई है-पहले शामें परिवार के साथ शांत बीतती थीं, आजकल हलचल भरे बाज़ारों, ऑनलाइन धार्मिक प्रोग्रामों और रौनक भरी रातों का मेल है। यह एक याद दिलाने वाला समय है कि हम धीमें चलें और इबादत के इस पाक महीने की असली भावना को संजोए रखें।
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