सूरह अल-इंशिराह की आयत 1-8 का अर्थ और अनुवाद
सूरह अल-इंशिराह (अश-शर्ह), जो कुरान की 94वीं सूरह है और मक्का में अवतरित हुई थी, इसमें अल्लाह तआला का वादा है कि हर कठिनाई के साथ सुविधा भी अवश्य होती है। आयत 1 से 4 यह बताती हैं कि अल्लाह तआला ने पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का सीना खोल दिया, उनका बोझ हल्का कर दिया और उनके नाम को ऊँचा कर दिया।
आयत 5 और 6 इस बात की पुष्टि करती हैं कि कठिनाई के साथ निश्चित रूप से सुविधा भी होती है, यह एक वादा है जो विश्वास को मजबूत करने के लिए दोहराया गया है। आयत 7 और 8 यह याद दिलाती हैं कि किसी काम को पूरा करने के बाद भी मेहनत जारी रखनी चाहिए और केवल अल्लाह तआला पर भरोसा रखना चाहिए।
इस सूरह की व्याख्या पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दिल की शुद्धि, दावत में सहायता, तथा सब्र करने, अल्लाह पर भरोसा रखने और उसकी रज़ा की आशा में नेक काम करने के महत्व पर प्रकाश डालती है। यह सूरह मुसलमानों के लिए एक याद दिलाने वाली है कि चुनौतियों का सामना करने में अल्लाह की मदद और सुविधा मिलती रहती है।
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