खालिद अल-जलील की तिलावत कुछ और ही है, सच में बहुत कम सराही गई
जैसे, क्या तुमने उनकी सूरह ग़ाफ़िर सुनी है? जिस तरह वो अपना दिल उसमें उड़ेल देते हैं, वो बस... बहुत खूबसूरत है। अल्लाह उन्हें बरकत दे। ये सिर्फ पढ़ना नहीं है, तुम सच में जज़्बात महसूस करते हो।