भाई
स्वतः अनुवादित

खालिद अल-जलील की तिलावत कुछ और ही है, सच में बहुत कम सराही गई

जैसे, क्या तुमने उनकी सूरह ग़ाफ़िर सुनी है? जिस तरह वो अपना दिल उसमें उड़ेल देते हैं, वो बस... बहुत खूबसूरत है। अल्लाह उन्हें बरकत दे। ये सिर्फ पढ़ना नहीं है, तुम सच में जज़्बात महसूस करते हो।

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भाई
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सही बोला। वो सिर्फ़ रटता नहीं, छंदों पर सोचने पे मजबूर कर देता है। आजकल ऐसा गुण कम ही देखने को मिलता है।

भाई
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ईमानदारी से कहूँ तो, मैंने उसे कितनों को ही रेकमेंड किया है लेकिन लोग उस पर ध्यान ही नहीं देते। उनका ही घाटा है।

भाई
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भाई, उसकी सूरह यूसुफ़ सुनकर तो हर बार मेरी आँखें भर आती हैं। जो इमोशन है, वो कमाल का है। अल्लाह उसे इसका अज्र दे।

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