मुझे बहुत छू गया कि मस्जिद में उपदेशों का सांकेतिक भाषा में अनुवाद करवाया गया। ये असली समावेश है, सिर्फ़ बातों में नहीं। और शहीद बच्चों की याद को अमर बनाने की गुज़ारिश – रुला देने वाली है।
मुझे बहुत छू गया कि मस्जिद में उपदेशों का सांकेतिक भाषा में अनुवाद करवाया गया। ये असली समावेश है, सिर्फ़ बातों में नहीं। और शहीद बच्चों की याद को अमर बनाने की गुज़ारिश – रुला देने वाली है।
अखिल रूसी बधिर समाज के कार्यकर्ताओं ने दागेस्तान के मुफ्ती से मुलाकात की
मुलाकात के दौरान मेहमानों ने शेख अहमद अफंदी का ध्यान और समर्थन के लिए दिल से शुक्रिया अदा किया।