क्या अपनी मौत की दुआ करना ठीक है?
सबको सलाम, बस एक सवाल पर कुछ बातें शेयर करना चाहती हूँ जो कभी-कभी आता है। एक बहन ने हाल ही में पूछा था कि क्या अपनी मौत के लिए दुआ करना जायज़ है। तो, सीधा जवाब है नहीं, मौत माँगना मना है, चाहे अपने लिए हो या किसी अपने के लिए, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों। बल्कि, हमें सब्र करने और अल्लाह से अज्र माँगने की ताकीद की गई है। हमारे प्यारे नबी ﷺ ने हमें सिखाया कि किसी भी मुसीबत की वजह से मौत की इच्छा न करें। अगर सचमुच ज़रूरत महसूस हो, तो ये दुआ पढ़ें: 'ऐ अल्लाह, मुझे जीवित रख अगर ज़िंदगी मेरे लिए बेहतर है, और मेरी रूह ले ले जब मौत मेरे लिए बेहतर है।' (अल-बुखारी) यानी, सोचो तो-लंबी उम्र एक बड़ी नेमत है क्योंकि इससे हमें अच्छे अमल करने और अल्लाह के करीब आने का ज़्यादा मौका मिलता है। नबी ﷺ ने फरमाया कि बेहतरीन इंसान वो है जो लंबी उम्र जिए और नेकी करे। (अहमद और अल-तिर्मिज़ी) इब्न उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) ने एक बार किसी को मौत की कामना करते सुना, तो उन्होंने नरमी से समझाया: 'मौत मत माँगो; वैसे भी मरना है। बल्कि, अल्लाह से सलामती की दुआ करो।' शैख अल-फ़ौज़ान जैसे उलमा बताते हैं कि दुनियावी मुश्किलों की वजह से मौत चाहना, एक तरह से सब्र के खिलाफ है। फिर, हमें आगे क्या आने वाला है पता नहीं-शायद वो और भी मुश्किल हो, अल्लाह न करे। इस्तिसना तब है जब किसी को अपने ईमान का खतरा हो, जैसे बड़ी आज़माइश के दौरान, तो अपने दीन की हिफ़ाज़त करने की इच्छा करना समझ में आता है। तो, जब तक बात अपने दीन की हिफ़ाज़त या अल्लाह की राह में शहादत की उम्मीद की न हो, हमें सब्र करने और अल्लाह की हिकमत पर भरोसा करने पर ध्यान देना चाहिए। अल्लाह हम सबको ताकत दे और चीज़ें आसान करे। आमीन।