अज़ान का सही जवाब सुन्नत के मुताबिक़, हुक्म और दुआ के साथ
ज़्यादातर उलमा का मानना है कि अज़ान का जवाब देना सुन्नत-ए-मुअक्कदा है, नबी मुहम्मद स.अ.व. की हदीस की बुनियाद पर: "जब तुम अज़ान सुनो, तो वही कहो जो मुअज़्ज़िन कहता है" (मुस्लिम)। मुसलमानों को चाहिए कि वो मुअज़्ज़िन के हर कलिमे का जवाब दें, सिवाए "हय्या अलश शलाह" और "हय्या अलल फ़लाह" के, जिसका जवाब "ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह" से दें।
अज़ान के अल्फ़ाज़ और उनके जवाब: "अल्लाहु अकबर" का जवाब वही दें, "अश्हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाह" का जवाब वही दें, "अश्हदु अन्न मुहम्मदन रसूलुल्लाह" का जवाब वही दें, "हय्या अलश शलाह" और "हय्या अलल फ़लाह" का जवाब "ला हौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह" दें, और "अल्लाहु अकबर" और "ला इलाहा इल्लल्लाह" का जवाब वही दें। सुबह की अज़ान में जोड़े जाने वाले "अस-सलातु ख़ैरुम मिनन नौम" का जवाब भी वैसे ही दें।
अज़ान के बाद ये दुआ पढ़ना मुस्तहब है: "अल्लाहुम्म रब्ब हाज़िहिद दा'वतित ताम्मह..." (पूरी लिखी गई) जिसका मतलब है नबी मुहम्मद स.अ.व. के लिए वसीले और फ़ज़ीलत की दुआ माँगना। अज़ान सुनने के आदाब में मसरूफ़ियत से रुक जाना, अज़ान का सही जवाब देना, दुरूद पढ़ना, और अज़ान के बाद की दुआ पढ़ना शामिल है।
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