खाड़ी देशों की मांग: युद्धविराम महज़ लड़ाई रोकने से आगे जाए
खाड़ी देश चाहते हैं कि ईरान के साथ कोई भी युद्धविराम समझौता सिर्फ़ लड़ाई रोकने से ज़्यादा काम करे – इसे मिसाइलों, ड्रोनों, प्रॉक्सी सेनाओं और परमाणु महत्वाकांक्षाओं के ज़रिए ईरान के ख़तरे कम करने होंगे। उन्हें डर है कि जल्दबाज़ी में किया गया समझौता उनके दरवाज़े पर एक ‘ज़ख़्मी जानवर’ छोड़ देगा। इस इलाके में 4,700 से ज़्यादा प्रक्षेप्य गिर चुके हैं, जिनसे 30 से अधिक लोगों की मौत हुई है। होरमुज जलडमरूमध्य पर ईरान की नाकेबंदी वैश्विक ऊर्जा की कीमतें बढ़ा रही है। संयुक्त अरब अमीरात के राजदूत ने कहा, ‘एक साधारण युद्धविराम काफी नहीं है।’
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