जुमा का खुत्बा: हज में इरादे को सीधा रखने का महत्व
जुमा के खुत्बे में जिसका विषय 'पवित्र स्थानों की यात्रा पवित्र हृदय के साथ' था, हज पर जाने वालों के लिए चार महत्वपूर्ण बातें बताई गईं। पहली, हज की इबादत सिर्फ अल्लाह तआला की इबादत के लिए की जानी चाहिए, न कि पर्यटन या सामाजिक मकसद से। दूसरी, हज इस्लाम का पांचवा स्तंभ है और जो भी मुसलमान इसे करने की क्षमता रखता है, उसके लिए यह अनिवार्य है, जैसा कि अल्लाह ने कुरआन (सूरह आल-ए-इमरान, आयत 97) में फरमाया है।
तीसरी बात, पवित्र स्थानों की यात्रा पर जाने से पहले दिल को पाक करने और इरादे को सीधा रखने का महत्व है। चौथी बात, यह याद दिलाया गया कि जो व्यक्ति इबादत के लिए नहीं बल्कि दूसरे मकसद से हज पर जाता है, उसे नुकसान उठाना पड़ सकता है-जैसे कि इबादत का सवाब न मिलना, पैसे का बेकार खर्च होना, और गुनाहों की माफी न मिलना। इस खुत्बे में यह ज़ोर दिया गया कि हर नेकी इरादे पर निर्भर करती है, जैसा कि बुखारी द्वारा रिवायत किए गए हदीस में बताया गया है।
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