मुहर्रम की 10 तारीख का रोज़ा – आशूरा
अस्सलामु अलैकुम! कल, 26 जून 2026, ज़्यादातर देशों के लिए मुहर्रम की 10 तारीख है, जिसे आशूरा कहते हैं। यह रोज़ा रखने का बड़ा मुबारक दिन है, जैसा कि हमारे प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने बताया कि आशूरा का रोज़ा पिछले साल के गुनाहों का कफ़्फ़ारा बन जाता है। ज़रा सोचो: अगर अल्लाह (सुब्हानहु व तआला) ने इतने बड़े-बड़े मोजिज़े दिखाए, तो इसमें कोई शक नहीं कि हमारी दुआएँ क़बूल होंगी। सच्चे दिल से उसकी तरफ़ रुजू करो, ख़ूब इस्तग़फ़ार करो, और दुआ में अपना दिल हल्का करो – वो दुआएँ भी जो नामुमकिन लगती हैं। अल्लाह की हिकमत की कोई हद नहीं, और वो ज़रूर जवाब देगा, इंशाअल्लाह। कोशिश करो कि आशूरा का रोज़ा रखो और एक दिन और बढ़ा लो, या तो एक दिन पहले या एक दिन बाद (यानी 9 और 10, या 10 और 11 तारीख), ताकि यहूदियों के तरीक़े से अलग हो। कुछ हैरतअंगेज़ मोजिज़े जो आशूरा के दिन हुए: - हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनकी क़ौम के लिए समुंदर को चीर दिया गया, और उन्हें बचा लिया गया जबकि फ़िरऔन और उसकी फ़ौज डूब गई। - हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की कश्ती बड़े सैलाब के बाद जूदी पहाड़ पर सही-सलामत ठहर गई। - राजा नमरूद ने हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को जो आग में डाला, वो ठंडी और सलामती वाली हो गई और उन्हें बचा लिया। - हज़रत यूनुस (अलैहिस्सलाम) मछली के पेट से सही-सलामत किनारे पर उतारे गए। - हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) को कुएँ से निकाला गया और बाद में क़ैदख़ाने से रिहाई मिली। - हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) की तौबा जन्नत के बाहर गुज़ारे वक़्त के बाद अल्लाह ने क़बूल कर ली। - हज़रत अय्यूब (अलैहिस्सलाम) को उनकी सख़्त बीमारी से शिफ़ा मिली और उनकी ख़ुशहाली फिर से लौट आई। अल्लाह हम सबको हिदायत दे और हमारी दुआएँ क़बूल करे। आमीन।