दुबई ने आधिकारिक तौर पर 'गृहिणी' शब्द को 'पीढ़ी निर्माता' में बदला
दुबई सरकार ने आधिकारिक दस्तावेज़ों और प्रशासन में 'गृहिणी' (हाउसवाइफ़) शब्द को बदलकर 'जनरेशन शेपर' या 'पीढ़ी निर्माता' कर दिया है। यह नीति दुबई के क्राउन प्रिंस शेख़ हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के निर्देश पर घोषित की गई, ताकि आने वाली पीढ़ियों के चरित्र और गुणवत्ता को गढ़ने में माँ की रणनीतिक भूमिका को मान्यता दी जा सके।
नामकरण में यह बदलाव यह संदेश लेकर आया है कि घरेलू काम और बच्चों की परवरिश का राष्ट्र निर्माण में अहम मूल्य है। सरकार यह स्पष्ट करना चाहती है कि माँ सिर्फ़ घर-गृहस्थी नहीं संभालतीं, बल्कि पहली शिक्षक होती हैं जो बचपन से ही नैतिक मूल्य, भावनात्मक समझदारी और नेतृत्व की बुनियाद डालती हैं।
इस्लामी नज़रिए में, माँ को बच्चों की पहली मदरसा मानकर बहुत ऊँचा दर्जा दिया गया है। यह नीति उस शिक्षा से मेल खाती है कि राष्ट्र-निर्माण की शुरुआत परिवार को मज़बूत करने से होती है, और इसके लिए माँ की भूमिका का सम्मान और सहयोग ज़रूरी है। उम्मीद है कि इस कदम से सभ्यता निर्माण में महिलाओं के योगदान को लेकर वैश्विक नज़रिया बदलेगा।
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