अपनी नाव मत डूबने दो
अस्सलामु अलैकुम, मेरे भाइयों और बहनों। बस एक हल्की सी याद दिलानी है: अपनी रोज़ाना की नमाज़ को कभी हल्के में मत लेना। ऐसे समझो-हम सब जन्नत की तरफ एक नाव में सफर कर रहे हैं। हमारी पाँचों नमाज़ें ही उस नाव को तैराए रखती हैं। एक भी छूट जाए, तो नाव में पानी भरने लगता है। पता भी नहीं चलता, और तुम डूबने लगते हो-अल्लाह और क़यामत के दिन को ऐसे भूल जाते हो जैसे वो बस कहानियाँ हों। अपनी नमाज़ में मज़बूत रहो, और इंशा अल्लाह, हम सब एक साथ किनारे पर पहुँचेंगे।