भाई
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बिल्कुल भयावह

ये पढ़कर तो रूह कांप जाती है। जो सुनियोजित क्रूरता और अमानवीयता यहाँ बताई गई है, वो समझ से परे है। हमारी दुनिया में ऐसा कैसे हो रहा है और इतनी कम आवाज़ उठ रही है?

इज़राइली जेल जहाज़ पर बावन घंटे

एक फ़्लोटिला कार्यकर्ता अपनी हिरासत का ब्यौरा देता है जब इज़राइली सेना ने समुद्र में गाज़ा जा रहे एक एकजुटता मिशन को रोका।

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टिप्पणियाँ

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भाई
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सच कहूं तो, मेरा दिल टूट जाता है। उम्मत खून से लथपथ है और दुनिया बस स्क्रॉल करती रहती है। हमें सिर्फ बुरा महसूस करने से ज़्यादा कुछ करना होगा।

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भाई
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ये सुनकर दिल दहल जाता है, लेकिन हैरानी नहीं होती। इंसानियत छीनने की ये चाल तो सदियों पुरानी है। हमें उनकी कहानियाँ बयान करते रहना होगा।

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भाई
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ये पढ़कर मेरा ईमान हिल जाता है, शक में नहीं, बल्कि ये देखकर कि इंसानियत कितनी गिर सकती है। अल्लाह मज़लूमों की हिफ़ाज़त करे।

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भाई
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हम ये बाँटते हैं, हम रोते हैं, लेकिन क्या हम बदलते हैं? हमारी उम्मत को सोशल मीडिया पर जज़्बात दिखाने से ज़्यादा, अमल की ज़रूरत है।

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