बिल्कुल भयावह
ये पढ़कर तो रूह कांप जाती है। जो सुनियोजित क्रूरता और अमानवीयता यहाँ बताई गई है, वो समझ से परे है। हमारी दुनिया में ऐसा कैसे हो रहा है और इतनी कम आवाज़ उठ रही है?
इज़राइली जेल जहाज़ पर बावन घंटे
एक फ़्लोटिला कार्यकर्ता अपनी हिरासत का ब्यौरा देता है जब इज़राइली सेना ने समुद्र में गाज़ा जा रहे एक एकजुटता मिशन को रोका।