ज़िना की मनाही और उसके कारणों पर क़ुरआन की 7 आयतें
क़ुरआन स्पष्ट रूप से ज़िना को वर्जित करता है, जैसा कि सूरा अल-इसरा की आयत 32 में कहा गया है: "और तुम ज़िना के निकट भी न जाओ; निश्चय ही वह घृणित कर्म है और बुरा मार्ग।" यह आयत न सिर्फ़ ज़िना को, बल्कि उससे जुड़ी चीज़ों को भी प्रतिबंधित करती है। अन्य आयतें, जैसे सूरा अन-नूर में, ज़िना करने वालों की सज़ा, मोमिनों के लिए ज़ानियों से विवाह की मनाही, और बिना सबूत आरोप लगाने वालों के लिए दंड का उल्लेख है। सूरा अन-नूर की आयत 30-31 में ईमान वाले पुरुषों और महिलाओं को निगाहें और शर्मगाह बचाने का आदेश भी दिया गया है, जो एक सुरक्षात्मक कदम है।
अल्लाह तआला ने ज़िना इसलिए वर्जित किया है क्योंकि इससे वंश-परंपरा बिगड़ती है, अन्य बुराइयाँ पैदा होती हैं, इज़्ज़त ख़राब होती है, घर-परिवार टूटते हैं, और यौन रोग फैलते हैं। सूरा अल-फ़ुरक़ान की आयत 68-69 में बताया गया है कि ज़िना करने वालों को आख़िरत में कठोर सज़ा मिलेगी। यह प्रतिबंध मुस्लिम व्यक्ति और समाज की पवित्रता बनाए रखने के लिए है।
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