मग़रिब की सुन्नत क़बलियाह नमाज़ की जानकारी: दलील, नियत और तरीका
मग़रिब की क़बलियाह नमाज़ एक सुन्नत इबादत है जो मग़रिब की फ़र्ज़ नमाज़ से पहले पढ़ी जाती है। हालाँकि यह वाजिब नहीं है, लेकिन नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की हदीसों के आधार पर इसकी सिफारिश की गई है, जिसमें बुख़ारी की एक रिवायत भी शामिल है जो कहती है: 'जो चाहे वो मग़रिब से पहले सुन्नत नमाज़ पढ़े...' (बुख़ारी, नंबर 1183)। एक और हदीस में अज़ान और इक़ामत के बीच नमाज़ पढ़ने की फ़ज़ीलत का भी ज़िक्र है।
इस नमाज़ की नियत तक़बीर-ए-तहरीमा के वक़्त दिल में पढ़ी जाती है, इस तरह: 'उसल्ली सुन्नतल मग़रिबि रक़अतैनी क़बलिय्यतन मुस्तक़बिलल क़िब्लति अदा-अन लिल्लाहि तआला।' इसका तरीका आम दो रक़अत की सुन्नत नमाज़ की तरह ही है, जो तक़बीर-ए-तहरीमा से शुरू होकर सलाम तक चलता है।
इसे पढ़ते वक़्त पहली रक़अत में सूरह अल-काफ़िरून और दूसरी रक़अत में सूरह अल-इख़लास पढ़ने की सलाह दी जाती है, जैसा कि किताब 'निहायतुज़ ज़ैन' में बताया गया है। यह नमाज़ फ़र्ज़ इबादत को पूरा करती है और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत का एक हिस्सा है।
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