क़ाबील और हाबील की कहानी: हसद के ख़तरे और इंसानियत का पहला क़त्ल का सबक़
क़ाबील और हाबील की कहानी, जो नबी आदम अलैहिस्सलाम के दो बेटे थे, हसद और नफ़्सानी ख़्वाहिशों के ख़तरे सिखाती है। क्रॉस-शादी की वजह से झगड़ा क़ुर्बानी के इम्तिहान पे पहुँचा, जहाँ हाबील की सच्चे दिल से दी गई क़ुर्बानी क़ुबूल हुई, जबकि क़ाबील की लापरवाही से दी गई क़ुर्बानी रद्द हो गई।
इस रद्दी ने क़ाबील को हाबील का क़त्ल करने पे उकसाया, इंसानी तारीख़ का पहला क़त्ल। अल्लाह तआला ने एक कौआ भेजा ताकि क़ाबील को लाश दफ़नाने का तरीक़ा सिखाए, और क़ाबील ने अपने किए पे पछतावा किया।
ये किस्सा बग़ैर हक़ किसी की जान लेने के गुनाह की भारीपन और अपने जज़्बात पर क़ाबू रखने, इबादत में इख़लास, और जलन से बचने की अहमियत की याद दिलाता है।
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