सहाबा का अटूट विश्वास: अपने ही परिवार के सदस्यों के खिलाफ संघर्ष
अस्सलामु अलैकुम, प्रिय मुस्लिम भाइयो और बहनो। अल्लाह कुरआन में कहता है: 'तुम ऐसे लोग नहीं पाओगे जो अल्लाह और अंतिम दिन पर विश्वास रखते हैं और उन लोगों से प्रेम करते हैं जो अल्लाह और उसके رسول के विरोधी हैं, चाहे वे उनके पिता हों या पुत्र या भाई या उनके रिश्तेदार हों।' यह आयत साहाबा की विश्वास और दृढ़ता को उजागर करती है, जो अल्लाह और उसके रसूल के विरोधियों के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार थे, भले ही वे उनके परिवार के सदस्य हों। इब्न कसीर के अनुसार, इस आयत का प्रत्येक भाग एक साहाबी से संबंधित है जिसने अपने परिवार के सदस्य को मार डाला था। उदाहरण के लिए, अबू उबैदा अमीर बिन अब्दुल्लाह बिन अल-जर्राह ने बدر की लड़ाई में अपने अविश्वासी पिता को मार डाला। इसी तरह, अबू बक्र अस-सिद्दीक ने अपने अविश्वासी पुत्र अब्दुर-रहमान को मारने का इरादा किया, जबकि मुसाब बिन उमैर ने अपने भाई उबैद बिन उमैर को मार डाला। उमर बिन अल-खत्ताब ने भी बدر में अपने एक रिश्तेदार को मार डाला। इन उदाहरणों से साहाबा की अपने धर्म के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का पता चलता है, जब उन्हें कठिन निर्णयों का सामना करना पड़ा। आशा है कि हम उनके उदाहरण से सीखें और अपने विश्वास और दृढ़ता को मजबूत करने का प्रयास करें। jazakum allahu khayran।