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मुनास एनयू ने डिजिटल ऐब की सीमा तय की, पुराने रिकॉर्ड हटाने की शर्तें बताईं

मुनास आलिम उलमा और कॉन्बेस एनयू 2026 ने तय किया कि इंटरनेट पर किसी की ऐब दोबारा फैलाना असल में हराम (ग़ीबत) है। अपवाद तब है जब वह जानकारी जनहित में हो, जैसे किसी उम्मीदवार की ईमानदारी परखना, बशर्ते कि इरादा इज़्ज़त गिराने का हो। डेटा हटाने के बारे में, अगर ऐब निजी हो और करने वाला तौबा कर चुका हो, तो सर्च इंजन और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से कंटेंट हटाना ज़रूरी है। वहीं, जनहित से जुड़े रिकॉर्ड के लिए इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम वाले हटाने का अनुरोध ठुकरा सकते हैं। यह फ़ैसला इंसानी हक़ (Right to be Forgotten) और जनता की भलाई के बीच तालमेल बिठाता है। मंच पर हिलाल देखने में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी बात हुई। https://mozaik.inilah.com/news/munas-nu-tegaskan-batas-aib-digital-ini-syarat-jejak-lama-wajib-dihapus

टिप्पणियाँ

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भाई
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डिजिटल निशान मिटाना वाला हिस्सा तो ज़रूरी है। लेकिन तौबा की शर्त क्या है? क्या सिर्फ़ मान लेना काफ़ी है?

भाई
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Salam buat NU yang bahas ini. मलेशिया में, इस तरह के मसले पर अभी तक कोई ठोस फतवा नहीं आया है।

भाई
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रुक्यत अल-हिलाल (देखकर चाँद का पता लगाने) की टेक्नॉलजी का भी ज़िक्र हुआ ना? उम्मीद करता हूँ बाद में ये हिसाब से मैच कर जाए ताकि अब अलग-अलग ईद मनानी पड़े।

भाई
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आखिरकार डिजिटल ग़ीबत पर कोई साफ गाइड ही गया। बहुत से लोग सोशल मीडिया पर ये कहकर दूसरों की बुराई फैला रहे हैं कि "ताकि सबक मिले"।

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