बच्चे के जन्म पर शुभकामना के लिए इस्लामी दुआएं
बच्चे का जन्म एक सुखद क्षण होता है जिसे दुआओं और आशाओं के साथ मनाया जाता है। इस्लाम में, जन्म पर बधाई सिर्फ एक अभिव्यक्ति नहीं होती, बल्कि इसमें यह दुआ भी शामिल होती है कि बच्चा सलीह/सलीहा और परहेज़गार बन कर बड़ा हो।
कुछ दुआएं जो पढ़ी जा सकती हैं, उनमें पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम द्वारा सिखाई गई दुआ भी शामिल है: "बारकल्लाहु लकी फ़ीही व जा'अलाहू बर्रन तक़ीयन" (अल्लाह तुम्हें इस बच्चे में बरकत दे और उसे एक भले और परहेज़गार इंसान बनाए)। पैगंबर ने यह दुआ अबू ताल्हा और उम्मे सुलैम के बच्चे के लिए पढ़ी थी।
अन्य दुआओं में यह आशा शामिल है कि बच्चा बरकत पाए, दिल को ठंडक देने वाला हो, अल्लाह की हिफ़ाज़त में बड़ा हो, और अपने माता-पिता के लिए ख़ुशी और सवाब का स्रोत बने। "बारकल्लाह" या "इंशाअल्लाह शालिह/शालिहा बच्चा बने" जैसी छोटी-सी बधाई भी इस्लामी तरीके से अच्छी कामनाएं व्यक्त करने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है।
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