मेरी अन्य इस्लाम स्वीकार करने वाली बहनों के लिए और जो अपना रास्ता ढूंढ रहे हैं
जो कोई इस्लाम की ओर आता है, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में, यह याद दिलाना वास्तव में मेरी मदद करता है, और मुझे आशा है कि यह आपकी भी मदद करेगा, चाहे आप विश्वास में दृढ़ हों या आपको कठिनाई का सामना करना पड़ रहा हो। चीजों को संक्षिप्त और सारगर्भित रखने पर हदीस: * **नमाज़ की इमामत**: पैगंबर ﷺ ने कहा: *"जब तुम नमाज़ पढ़ा रहे हो, इसे संक्षिप्त रखो, क्योंकि लोगों में बीमार, बुजुर्ग और कमजोर लोग शामिल होते हैं।"* (सुनन नसाई)। यह दूसरों के प्रति सहृदय होने के बारे में है। * **जुमे का खुतबा**: उन्होंने ﷺ यह भी कहा: *"लंबी नमाज़ और संक्षिप्त उपदेश किसी व्यक्ति की धर्म की समझ के लक्षण हैं।"* (सहीह मुस्लिम)। बुद्धिमत्ता का अर्थ है बात को सीधे मुद्दे पर रखना। * **दुआ करना**: पैगंबर ﷺ ने जो दुआ-ए-कुनूत सिखाई है वह अच्छी और संक्षिप्त है। विद्वान कहते हैं कि इसे बहुत लंबा करना पसंद नहीं किया जाता, क्योंकि यह आपके साथ नमाज़ पढ़ रहे लोगों के लिए कठिन हो सकता है। संतुलित रहना ही तरीका है। * **जीवन संक्षिप्त है**: पैगंबर ﷺ ने इस जीवन की तुलना *"एक यात्री से की जो किसी पेड़ की छांव में थोड़ी देर आराम करता है, फिर आगे बढ़ जाता है।"* (अहमद)। यह याद रखने का एक गहरा तरीका है कि हमारा यहाँ का समय सीमित है, इसलिए हमें महत्वपूर्ण चीजों पर ध्यान देना चाहिए। * **सामान्य तौर पर**: हर चीज़ में-हम कैसे बात करते हैं, हम कैसे इबादत करते हैं, हम क्या करते हैं-चीजों को संक्षिप्त पर सारगर्भित रखना सबसे अच्छा तरीका है, खासकर जब अन्य मुसलमान शामिल हों।