बेहद आभारी और शुक्रगुज़ार महसूस कर रही हूँ
सलाम सभी को। ये साझा करना बहुत ज़रूरी लगा। मैं क़ुरआन को उसकी मूल अरबी भाषा में पढ़ पाने के लिए बेहद आभारी और बरकतवंद महसूस कर रही हूँ। इसकी लय और प्रवाह सचमुच अद्भुत है-इस जैसा कुछ और हो ही नहीं सकता। कुछ दिनों से तो मैं इसे पढ़ते समय भावुक हो जाती हूँ और आँखें भी नम हो जाती हैं। शायद ये सिर्फ मेरा ही अनुभव हो, मगर सुब्हानअल्लाह, इसकी खूबसूरती किसी और चीज़ से परे है। अल्हम्दुलिल्लाह इस नेअमत के लिए। बस ये कहना ज़रूरी लगा। अब इंशाअल्लाह, अपनी तिलावत पर वापस लौटती हूँ।