दयाह बाबुल हुदा लामनो ने इब्दा किताब का आयोजन किया, 1448 हिजरी शैक्षणिक वर्ष की पढ़ाई शुरू
दयाह बाबुल हुदा गाम्पोंग जाम्बो मासी, जया जिला, आचेह जया ने बुधवार (17/06) को इब्दा किताब की रस्म आयोजित की, जो 1448 हिजरी शैक्षणिक वर्ष की शिक्षण-अधिगम गतिविधियों की शुरुआत का प्रतीक है। इसकी अगुआई आबाती जलालुद्दीन बस्याह ने की, साथ में आबोन आमिर भी थे, और पूरी शिक्षक परिषद और संतरियों ने भाग लिया।
यह रस्म दयाह की एक परंपरा है जिससे किताब कुनिंग (पीली किताबों) की पढ़ाई फिर से शुरू की जाती है, और अल्लाह की प्रसन्नता पाने के लिए ज्ञान प्राप्ति की नीयत को ताज़ा किया जाता है। आबाती जलालुद्दीन बस्याह ने ज़ोर देकर कहा कि इल्म उनके लिए रोशनी है जो इख्लास, अदब और गंभीरता बनाए रखते हैं। उन्होंने नसीहत दी, "इल्म हासिल करना सिर्फ ज्ञान का पीछा करना नहीं है, बल्कि एक मुसलमान के अख़लाक़ और शख़्सियत को भी ढालना है। बरकत वाला इल्म वो है जिस पर अमल किया जाए और जो उम्मत को फ़ायदा पहुँचाए।"
आबोन आमिर ने संतरियों से नए शैक्षणिक वर्ष को अनुशासन, अख़लाक़, इबादत और तुरास किताबों के अध्ययन में गंभीरता बढ़ाने का शुरुआती बिंदु बनाने का आह्वान किया। वहीं, टीजीके. कसवती अज़किया, एस.पीडी. ने कहा कि इब्दा किताब अल्लाह के प्रति संकल्प और शुक्रगुज़ारी को मज़बूत करने का एक पल है, ताकि प्राप्त इल्म बरकत और फ़ायदेमंद हो।
यह परंपरा दयाह बाबुल हुदा की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिसमें वो उलमा द्वारा विरासत में मिली किताब कुनिंग आधारित इस्लामी शिक्षा को संरक्षित कर रहा है।
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