तलबियाह की संपूर्ण मार्गदर्शिका: अर्थ, नियम और सुन्नत के अनुसार तरीका
तलबियाह "लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक" एक आज्ञाकारिता का आह्वान है, जिसे हज और उमराह के तीर्थयात्री इहराम की अवस्था में उच्चारित करते हैं। यह पाठ, जिसका अर्थ है "हे अल्लाह, मैं आपके बुलावे का पालन कर रहा हूँ," अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण की भावना को दर्शाता है और नबी मुहम्मद (स.अ.व.) की सुन्नत के अनुसार प्रोत्साहित किया गया है।
इसे पढ़ने के नियम फ़िक़्ह के मतानुसार भिन्न होते हैं। अधिकांश विद्वान इसे सुन्नत-ए-मुअक्कद (अत्यधिक अनुशंसित) मानते हैं। तलबियाह का आरंभ मीक़ात में इहराम की नीयत के बाद होता है और तवाफ़ (उमराह) शुरू करने या जमरात-ए-अक़बा (हज) के बाद समाप्त हो जाती है।
उच्चारण का तरीका रसूलुल्लाह (स.अ.व.) के निर्देशों का पालन करता है: पुरुषों के लिए ऊँची आवाज़ में और महिलाओं के लिए धीमी आवाज़ में पढ़ना सुन्नत है, इसे तीन बार पढ़ा जाता है, और दुरूद व दुआ से जोड़ा जा सकता है। अब्दुल्लाह बिन उमर जैसे कुछ सहाबा ने सही हदीसों में वर्णित अतिरिक्त शब्द भी जोड़े हैं।
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