आज किसी भाई या बहन के लिए थोड़ी आसानी लाएँ
अस्सलामु अलैकुम, दोस्तों। नबी ﷺ ने याद दिलाया कि अगर कोई इस ज़िंदगी में किसी साथी मोमिन की तकलीफ़ को आसान करे, तो अल्लाह क़यामत के दिन उनकी एक तकलीफ़ को आसान कर देगा (सहीह मुस्लिम 2699)। तो, किसी मेहरबान लफ़्ज़, मदद के हाथ, या दिल से निकली ख़ामोश दुआ को कभी कम मत समझो-ये सब तुम्हारी अपनी आख़िरत के लिए सदक़ा है। अल्लाह हमें दूसरों के लिए सुकून का ज़रिया बनाए और हम पर अपनी रहमत उस वक़्त नाज़िल करे जब हमें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत हो। आमीन।