पैगंबर (उन पर शांति हो) की अपनी उम्मत के प्रति मुहब्बत के बारे में एक ख़ूबसूरत हदीस
अनस इब्न मालिक (अल्लाह उनसे राज़ी हो) ने रिवायत किया है कि अल्लाह के रसूल (उन पर शांति हो) ने एक बार फरमाया, "मैं कितना चाहता हूं कि मैं अपने भाइयों से मिलूं।" उनके साथियों ने पूछा, "क्या हम आपके भाई नहीं हैं?" उन्होंने जवाब दिया, "तुम मेरे साथी हो, लेकिन मेरे भाई वो हैं जो मुझे बिना देखे मुझ पर ईमान लाए।" और याद रखो, पैगंबर (उन पर शांति हो) ने हमें यकीन दिलाया है कि "तुम उनके साथ होगे जिनसे तुम मुहब्बत करते हो।" इस बारे में सोचो-हालांकि हम दुनिया भर में लाखों मोमिनों के बीच बिखरे हुए हैं, लेकिन क़यामत के दिन हमारा ईमान चमकेगा। क्या तुम हमारे प्यारे पैगंबर (उन पर शांति हो) से फिर से मिलने के लिए नहीं चाहोगे? स्रोत: मुसनद अहमद 12579