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तसुआ और आशूरा के रोज़े की नियत, दलील और फ़ज़ीलत के साथ

मुसलमानों को सुन्नत अमल ज़्यादा करने की सलाह दी गई है, जिसमें 9 मुहर्रम को तसुआ का रोज़ा और 10 मुहर्रम को आशूरा का रोज़ा शामिल है। बुख़ारी और मुस्लिम की हदीस में नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया, "जो शख़्स अल्लाह की राह में एक दिन रोज़ा रखता है (सुन्नत रोज़ा), तो अल्लाह उसके चेहरे को सत्तर साल तक जहन्नम की आग से दूर कर देगा।" तसुआ के रोज़े की नियत: नवैतु सौमा ग़दिन 'अन अदाइ सुन्नतित तसुआ लिल्लाहि तआला (मैंने अल्लाह तआला के लिए कल तसुआ का सुन्नत रोज़ा रखने की नियत की)। आशूरा के रोज़े की नियत: नवैतु सौमा ग़दिन 'अन अदाइ सुन्नतिल आशूरा लिल्लाहि तआला (मैंने अल्लाह तआला के लिए कल आशूरा का सुन्नत रोज़ा रखने की नियत की)। अगर सुबह से कुछ खाया-पीया गया हो और कोई और रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ हुई हो, तो दिन में भी नियत की जा सकती है। इस रोज़े की सलाह की दलीलें, जैसे मुस्लिम की हदीस जिसमें मुहर्रम की नौवीं तारीख़ के रोज़े का ज़िक्र है, और बुख़ारी की हदीस जिसमें है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रमज़ान के बाद आशूरा के रोज़े को बहुत ख़ास अहमियत देते थे। इसकी फ़ज़ीलत: मुहर्रम का रोज़ा रमज़ान के बाद सबसे अफ़ज़ल रोज़ा है (मुस्लिम), यह हुरमत वाले महीनों में आता है, और आशूरा का रोज़ा पिछले एक साल के गुनाहों को मिटा देता है (मुस्लिम)। इमाम नववी बताते हैं कि यह मिटाना छोटे गुनाहों के लिए है, जबकि बड़े गुनाहों के लिए सच्ची तौबा ज़रूरी है। https://mozaik.inilah.com/ibadah/niat-puasa-tasua-dan-asyura-lengkap-dengan-dalil-dan-keutamaannya

टिप्पणियाँ

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बहन
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شکریہ بہن، آپ نے مکمل نیّت شیئر کر دی۔ کبھی کبھی الفاظ بھول جاتے ہیں، تو یہ بہت عملی ہے۔ ویسے، اگر صرف عاشورہ کا روزہ رکھوں تو چلے گا نا؟

बहन
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माशाअल्लाह, ये बहुत ही फ़ायदेमंद याद दिहानी है! इंशाअल्लाह इस साल फिर से तासुआ और आशूरा के रोज़े रख पाऊँगी। बीते साल के गुनाह माफ़ हो जाएँ, यही दुआ है। आमीन।

बहन
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मुहर्रम के महीने में मेरा दिल हमेशा खुशी से भर जाता है, इसके रोज़े बहुत खास हैं न। और सुना है कि ये पूरे साल के गुनाह मिटा देते हैं, सुब्हानअल्लाह।

बहन
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जज़ाकिल्लाह खैर उख़्ती, तुम्हारी लिखी बात दिल को छू गई। मुझे हदीस याद गई कि अल्लाह के रास्ते में रोज़ा रखने वाले को जहन्नम से 70 साल दूर कर दिया जाता है, माशाअल्लाह... अल्लाह करे हम सब इस पर क़ायम रहें।

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