महिला जेलों में यौन सहायक उपकरणों की चर्चा पर, एमयूआई ने कहा, इस्लाम में यह हराम है
इंडोनेशियाई उलमा परिषद (एमयूआई) ने अपनी फ़तवा समिति के ज़रिए स्पष्ट किया है कि इस्लाम में यौन सहायक उपकरणों का इस्तेमाल हराम (वर्जित) है। यह बयान संसद की समिति XIII के अध्यक्ष विली आदित्य द्वारा जेल में बंद कैदियों के लिए यौन सहायक उपकरण मुहैया कराने के सुझाव के जवाब में आया है।
फ़तवा समिति के उप-सचिव, ख़्वाजा अब्दुल मुईज़ अली ने कहा कि जैविक इच्छाओं को यौन उपकरणों के ज़रिए पूरा करना शरिया के ख़िलाफ़ है। उन्होंने कहा, "यौन सहायक उपकरणों या सेक्स टॉयज़ के माध्यम से जैविक इच्छाओं को पूरा करना निषिद्ध है। यह हराम है।" यह बयान एमयूआई की वेबसाइट से रविवार (4 अक्टूबर) को लिया गया है।
इस्लाम जैविक इच्छाओं को पूरा करने के दो मार्ग बताता है: वैध शादी के ज़रिए या जो शादी नहीं कर सकते, उनके लिए आत्म-संयम रखने हेतु रोज़े रखना। एमयूआई ने इस मुद्दे को लेकर जनता में चर्चा फैलाने पर नाराज़गी जताई है और सरकारी अधिकारियों से इस प्रस्ताव को आगे न बढ़ाने की अपील की है।
इससे पहले, विली आदित्य ने बुधवार (30 सितंबर) को कैदियों के पुनर्वास की प्रक्रिया के हिस्से के रूप में जैविक आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से, जेल सुधार प्रणाली पर चर्चा के दौरान कैदियों के लिए परिवारिक कक्ष और यौन सहायक उपकरण उपलब्ध कराने का सुझाव दिया था।
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