महिला जेलों में सेक्स सहायक उपकरणों की चर्चा, एमयूआई ने हलाल को गैर-इस्लामी बताया
इंडोनेशियाई उलेमा परिषद (एमयूआई) की फतवा समिति ने स्पष्ट किया है कि इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार यौन सहायक उपकरणों (सेक्स टॉय) का उपयोग हराम (निषिद्ध) है। यह बयान संसद की कमेटी XIII के अध्यक्ष विली आदित्या के उस प्रस्ताव के जवाब में आया है, जिसमें जेलों में कैदियों के लिए यौन सहायक उपकरणों की व्यवस्था का सुझाव दिया गया था।
एमयूआई फतवा समिति के उप-सचिव, ख्वाजा अब्दुल मुइज अली ने कहा कि इस्लामी शरीयत के अनुसार, यौन सहायक उपकरणों के माध्यम से जैविक इच्छाओं को पूरा करना मना है। "यौन सहायक उपकरणों या सेक्स टॉय के जरिए जैविक इच्छाओं को पूरा करना निषिद्ध कार्यों में शामिल है। यह हराम है," उन्होंने कहा।
ख्वाजा मुइज अली ने आगे कहा कि इस्लाम जैविक इच्छाओं से निपटने के लिए दो रास्ते प्रदान करता है: शादी वैध तरीका है, और जो शादी करने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए रोज़ा (उपवास) आत्म-नियंत्रण का तरीका है। उन्होंने एक जनप्रतिनिधि द्वारा सार्वजनिक रूप से इस तरह की चर्चा करने पर अफसोस जताया और सुझाव दिया कि इस प्रस्ताव को आगे न बढ़ाया जाए।
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