तहज्जुद की नमाज़ 4 रकात: नियत, तरीका और दुआ
तहज्जुद की नमाज़ एक सुन्नत इबादत है जिसकी बहुत ताकीद की गई है। अल्लाह तआला ने सूरह अल-इसरा की आयत 79 में मुसलमानों को रात के कुछ हिस्से में इसे अदा करने की तरग़ीब दी है। यह इबादत दो रकात से शुरू की जा सकती है, लेकिन चार रकात भी बिना अत्तहिय्यात के पहले पढ़ी जा सकती है, जैसे ज़ोहर, अस्र और इशा की नमाज़ में होता है।
चार रकात तहज्जुद की नियत है "उसल्ली सुन्नतत-तहज्जुदी अरबा रकआतिन लिल्लाहि तआला" जिसका मतलब है "मैंने अल्लाह तआला के लिए चार रकात सुन्नत तहज्जुद की नियत की"। इसके तरीके में नियत पढ़ना, तकबीर-ए-तहरीमा, दुआ-ए-इस्तिफ़्ताह, सूरह अल-फ़ातिहा, कोई छोटी सूरत, रुकू, इक्तिदाल, सजदा और सलाम शामिल हैं। दूसरी रकात के बाद सीधे तीसरी और चौथी रकात के लिए खड़े हो जाएं, बिना अत्तहिय्यात के।
नमाज़ के बाद वह दुआ पढ़ना मुस्तहब है जो नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने सिखाई है, जिसे इमाम बुख़ारी और मुस्लिम ने रिवायत किया है। इस दुआ में अल्लाह की तारीफ़, उसके वादों, जन्नत, जहन्नुम, अंबिया, क़यामत के दिन की हक़ीक़त का इक़रार और तमाम गुनाहों की माफ़ी की दरख़्वास्त है।
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