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राष्ट्रीय बाल दिवस 2026 पर विचार: बच्चों को सिर्फ याद करना काफी नहीं, उन्हें सुरक्षित रखना भी ज़रूरी है

2026 का राष्ट्रीय बाल दिवस 23 जुलाई को मनाया गया जिसकी थीम थी “बच्चों से प्यार करो, उनकी रक्षा करो और उनका भविष्य बनाओ” और इस मौके पर #RuangAmanNyamanAnak नाम का राष्ट्रीय आंदोलन भी शुरू किया गया। हकीकत ये है कि जुलाई 2026 तक इंडोनेशियाई शिक्षक संघ फेडरेशन के आंकड़े बताते हैं कि शिक्षण संस्थानों में हिंसा के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है: पहले छह महीनों में कुल 55 केस, जो पिछले साल की समान अवधि से 100 प्रतिशत से भी ज्यादा है। इनमें से 78 प्रतिशत मामले यौन हिंसा के थे, जिनमें 275 पीड़ित थे; आरोपी ज्यादातर शिक्षक (54.5 प्रतिशत) और शिक्षा संस्थानों के प्रमुख रहे। 14 जुलाई 2026 को एमएएन 3 पादांग के एक छात्र द्वारा बनाए गए बम की घटना ये दिखाती है कि बदमाशी का शिकार बच्चा भी आगे चलकर गुनहगार बन सकता है। मामले की जड़ में देखें तो सामाजिक जीवन में धार्मिक मूल्यों से दूरी, डिजिटल निगरानी की कमजोरी और पूंजीवादी दृष्टिकोण है जो बाल संरक्षण को बस एक खानापूर्ति बना देता है। पर्मेंदिकदास्मेन नंबर 6 साल 2026 जैसी नीतियां तो मामलों को स्कूल प्रिंसिपल के हवाले कर इस पूरी व्यवस्था को और कमजोर ही करती हैं। इस्लाम बच्चों को एक अमानत मानता है जिनकी संपूर्ण सुरक्षा करना ज़रूरी है। खिलाफत का सिस्टम राज्य को एक संरक्षक (जुन्नाह) के तौर पर रखता है जो बच्चों की शारीरिक, मानसिक और धार्मिक सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार है। कुरान और हदीस में हिंसा और खुलेपन के साथ मेल-जोल के खिलाफ कड़ी मनाही है साथ ही परिवार और समाज की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया गया है। किसास जैसी कड़ी सजाएं अपराधियों पर लगाम लगाने में मददगार हो सकती हैं। राष्ट्रीय बाल दिवस 2026 का मौका ये आकलन करने का एक अवसर है कि बच्चों की सुरक्षा अभी भी कितनी अपर्याप्त है। https://www.harianaceh.co.id/2026/07/27/refleksi-han-2026-anak-tak-cukup-diperingati-mereka-harus-dilindungi/

टिप्पणियाँ

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भाई
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100% हिंसा के मामले बढ़े, पढ़कर ही गुस्सा आता है। स्कूल तो सुरक्षित जगह होनी चाहिए, उल्टा ये बदचलनी का अड्डा बन गया। क़िसास लागू होना चाहिए ताकि इन शिकारियों की अक्ल ठिकाने आए।

भाई
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बिल्कुल सही बात है, बच्चा एक अमानत है। अगर राज्य ही हाथ खड़े कर दे, तो फिर उनकी हिफाज़त कौन करेगा? शिक्षा मंत्रालय का वो आदेश कि ज़िम्मेदारी प्रिंसिपल पर डाल दो, ये तो बस पूँजीपतियों की चाल है। हमें एक इस्लामी निज़ाम चाहिए जो सख़्त सज़ा देकर ऐसी हरकतों का खात्मा करे।

भाई
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बुली किए गए छात्र का बनाया बम बहुत ही दुखद है। बुलीइंग का शिकार बच्चा अपराधी बन गया क्योंकि सही से कोई सुरक्षा नहीं मिली। सरकार को सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, असल में सामने आना होगा।

भाई
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अस्तग़फ़िरुल्लाह, स्कूलों में यौन हिंसा के आंकड़े देखकर रूह काँप जाती है। जो शिक्षक और प्रधानाचार्य बच्चों की रक्षा करने वाले होने चाहिए, वही अपराधी बन जाते हैं। सिस्टम पूरी तरह ख़राब हो चुका है, इस्लाम जैसी समग्र सुरक्षा की सख़्त ज़रूरत है।

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