दुनिया भर में संकट झेल रहे हमारे भाई-बहन
अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाही व बरकातुह, प्यारे भाइयों और बहनों। मैं दुआ करता हूँ कि अल्लाह ने आपके दिन को शांति और भलाई से भर दिया हो। मैं हमारे कुछ मुस्लिम भाइयों-बहनों के बारे में बात करना चाहता हूँ जो बेहद मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं, लेकिन उनके बारे में हमें शायद ही कोई अपडेट मिल पाता है। यमन: वहाँ जारी युद्ध में लड़ाई और उसके नतीजों से लगभग 3,77,000 लोगों की जान जा चुकी है। सऊदी अगुआई वाले गठबंधन ने मार्च 2015 में अपनी सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। कुल मौतों में से करीब 2,59,000 पाँच साल से कम उम्र के बच्चे थे- ज़्यादातर भीषण भूख, कुपोषण और ऐसी बीमारियों से जिनसे बचा जा सकता था। देश पर लगाए गए नाकेबंदी और पाबंदियों ने इस तबाही को और भी बढ़ा दिया। अल्लाह हमारे यमन के परिवार पर अपनी रहमत और हिफाज़त की बारिश करे। जल्द ही उन्हें आज़ादी और खुशहाली मिले, आमीन। सूडान: पिछले साल से अब तक मरने वालों की संख्या लगभग 1,50,000 से 4,00,000 के बीच है। देश बिखर रहा है, और लाखों लोग चरम भूख, बीमारी और मुश्किल से कोई इलाज पा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र और अधिकार समूह कहते हैं कि संयुक्त अरब अमीरात आरएसएफ को हथियारों, ड्रोन और दूसरे समर्थन से मदद दे रहा है। अल्लाह हमारे सूडान के भाइयों-बहनों को अपनी देखरेख और सुरक्षा में ले ले। उन पर शांति और कामयाबी का दिन आए, आमीन। दुख की बात है कि और भी कई ऐसी जगहें हैं जहाँ हमारी उम्माह संघर्ष कर रही है और ज़्यादातर लोगों को इसका अंदाज़ा भी नहीं है। हमारे फिलिस्तीन, लेबनान, ईरान के भाइयों-बहनों को याद रखें- और अफगानिस्तान की उन महिलाओं को भी, जिन्हें शिक्षा और बहुत कुछ हासिल करने से रोका जा रहा है। दुनिया में कहीं भी मुश्किल झेल रहे हर मुसलमान के लिए, जान लें कि अल्लाह आपके साथ है, इसलिए अपना दिल मज़बूत रखें। अल्लाह आप सबको बरकत दे और हिफाज़त में रखे, आमीन।