हमारी मुस्लिम बहनें बेहतर हक़दार हैं
सभी पाठकों को सलाम, अल्लाह आपके दिन हमेशा नेमतों से भर दे। शुरू करने से पहले बता दूं-मैं एक मुस्लिम लड़का हूं, और यह किसी की मंज़ूरी पाने के बारे में नहीं है। मैं बस दिल की बात कह रहा हूं क्योंकि मैं इस पर ख़ास बातचीत नहीं देखता, और सच कहूं तो ऑनलाइन की बकवास थका देती है। तो ये है जो मेरे सीने से उतारना ज़रूरी है। कुछ लोग शायद सोचें कि शीर्षक तो आम समझ है, लेकिन अफ़सोस, ऐसा नहीं है। आज की दुनिया में, ख़ास तौर पर मुसलमानों के बीच, हम अक्सर अपनी बहनों को दबाने की कोशिशें देखते हैं। क्यों? यह बिल्कुल बेमतलब है और इस्लाम में इसकी कोई बुनियाद नहीं। साफ़ कहूं-कुछ मुस्लिम मर्द, मैं सबको एक ही रंग से नहीं रंग रहा, ऐसे बर्ताव करते हैं जैसे हमारी बहनें ही उम्माह की मुश्किल हैं। मैंने एक क्लिप देखी थी जहां एक आदमी ने कहा कि वह नहीं चाहेगा कि उसकी बीवी पढ़ाई करे या यूनिवर्सिटी जाए। दूसरे औरतों को अपनी महत्वाकांक्षाएं छोड़कर बस घर पर रहने के लिए कहते हैं। यह उर्जा बिल्कुल ग़लत दिशा में है। दुनिया की पहली यूनिवर्सिटी एक मुस्लिम महिला, फ़ातिमा अल-फ़िहरिया ने 859 में मोरक्को में बनाई थी। और क़ुरआन का सबसे पहला हुक्म है 'पढ़ो' (96:1)। इल्म हासिल करना हर मुस्लिम, चाहे मर्द हो या औरत, के लिए ज़रूरी है। फिर भी सोशल मीडिया पर कुछ भाई इसके ख़िलाफ़ जोर लगाते हैं, शिक्षा में बहनों के बारे में सबसे बुरा मानकर-यह सोचकर कि वे रास्ता भटक जाएंगी। ऐसा क्यों मान लेना? क्यों न उन पर भरोसा करें और उनका हौसला बढ़ाएं ताकि वे नेक मिसाल बनकर चमक सकें? मुस्लिम महिलाएं बेहद अहम हैं; वे इस्लामोफोबिया के ख़िलाफ़ संघर्ष में सबसे आगे हैं। मीडिया की कहानियां हमें खलनायक बताती हैं, लेकिन इसकी सबसे ज़्यादा मार हमारी बाहर से दिखने वाली मुस्लिम बहनों पर पड़ती है-हिजाब, निकाब, बुरक़ा उन्हें निशाना बना देते हैं। हमले होते हैं, स्कार्फ़ फाड़े जाते हैं, रोज़ाना की दहशत। वे ही बहादुर हैं, ख़ास तौर पर पश्चिमी देशों में। इस्लाम में उनकी हैसियत भी बहुत बड़ी है। पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया, 'तुममें से सबसे बेहतर वह है जो अपनी बीवियों के लिए सबसे बेहतर हो।' जब कोई औरत मां बनती है, तो जन्नत उसके कदमों तले होती है। और युद्धक्षेत्रों की बहनों के बारे में सोचें-गाज़ा की माएं, वे जो सिर्फ़ मुस्लिम होने के कारण हिंसा झेल रही हैं, अफ़गानिस्तान की लड़कियां जिन्हें स्कूलों से रोका गया है। इस बीच, हम यहां किस बारे में बहस करते हैं? अल्लाह हमें माफ़ करे। मैं सच्चे दिल से अपनी बहनों की कामयाबी, सेहत और ख़ुशी चाहता हूं; मैं उनके लिए हमेशा दुआ करता हूं। मुस्लिम मर्दों को नेता, गुज़ारा करने वाले, चरित्र और ईमान में मज़बूत होना चाहिए-बहनें यही चाहती हैं, एक नेक, ज़िम्मेदार शौहर। कोई भी समझदार औरत इससे इनकार नहीं करती। भाइयो, हमें हर तरह से-दिमाग़, तन, रूह, वित्त-आगे बढ़ना होगा, पहले ख़ुद के लिए। अगर हम ख़ुद की इज़्ज़त नहीं करेंगे, तो बीवी क्यों करेगी? और हम जवानी में ग़लत रास्ते पर नहीं भटक सकते और फिर एक पाक, बेदाग़ बीवी की मांग कर सकते हैं। यह बचकाना और नाइंसाफ़ी है। हराम के लिए फ्री पास जबकि उसके लिए बेदाग़ मापदंड? बेहूदगी है। कोई आश्चर्य नहीं कि कुछ बहनें कहीं और देखती हैं या कहती हैं कि मुस्लिम मर्द बुरे हैं-सब नहीं, लेकिन यह पैटर्न मौजूद है। मैं मर्दों पर हमला नहीं कर रहा; मैं ख़ुद एक हूं। यह उन ढोंगी लोगों के लिए एक चेतावनी है जिन्हें ख़ुद को जांचने की ज़रूरत है। अल्लाह सबको हिदायत दे और बरकत दे। आपका दिन या रात अच्छी गुज़रे।