अशूरा का रोज़ा 2026: महत्व, इतिहास और पूरा शेड्यूल
पीबीएनयू की फ़लाकियाह संस्था ने 1448 हिजरी के मुहर्रम की शुरुआत बुधवार, 17 जून 2026 को तय की है। इस हिसाब से तासूआ का रोज़ा (9 मुहर्रम) गुरुवार, 25 जून 2026 को और अशूरा का रोज़ा (10 मुहर्रम) शुक्रवार, 26 जून 2026 को होगा। मुहर्रम हराम महीनों में से एक है जिसकी बहुत बड़ी फज़ीलत है।
अशूरा के रोज़े का एक अहम इतिहास है। जब पैगंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मदीना हिजरत करके गए, तो आपने देखा कि यहूदी उस दिन रोज़ा रखते हैं, जो पैगंबर मूसा अलैहिस्सलाम की सलामती की शुक्रगुज़ारी में था। पैगंबर ने फ़रमाया, "हम तुमसे ज़्यादा मूसा के हक़दार हैं," फिर अशूरा के रोज़े का हुक्म दिया। यहूदियों से अलग पहचान बनाने के लिए तासूआ और ग्यारहवीं का रोज़ा भी सुन्नत है, और इसके तीन दर्जे हैं: सिर्फ़ अशूरा का रोज़ा, अशूरा और तासूआ, या तीनों।
रमज़ान के रोज़े फ़र्ज़ होने के बाद अशूरा के रोज़े का हुक्म सुन्नत-ए-मुअक्कदा है। इसकी फज़ीलत में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया, "रमज़ान के बाद सबसे अफ़ज़ल रोज़ा अल्लाह के महीने मुहर्रम का रोज़ा है" (मुस्लिम)। अशूरा का रोज़ा पिछले साल के छोटे गुनाहों को मिटा सकता है (मुस्लिम)। अराफ़ा के रोज़े से फ़र्क ये है कि अराफ़ा का रोज़ा ख़ास नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की उम्मत के लिए है, इसलिए ज़्यादा ख़ास है।
अशूरा का दिन कई अहम वाक़ियात को भी यादगार बनाता है, जैसे हज़रत आदम की तौबा का क़बूल होना, हज़रत नूह का सलामत बचना, और हज़रत मूसा का फ़िरऔन से निजात पाना। ज़्यादा से ज़्यादा ज़िक्र और इस्तग़फ़ार करने की ताकीद है, जैसे 'हसबुनल्लाह व ने'मल वकील' 70 बार पढ़ना। अल्लाह करे हम अशूरा की बरकतें हासिल कर सकें।
https://kabarbaik.co/puasa-asy