एक दिलचस्प दृष्टिकोण
कभी यह सोचा ही नहीं था कि पैगंबर (स.व.व.) के लिए खुशी महसूस करना सिर्फ एक भावना नहीं, बल्कि एक विहित कर्तव्य हो सकता है। इब्न तैमियाह का उद्धरण इस तरह के संदर्भ में देखना जिज्ञासापूर्ण है, क्योंकि आमतौर पर उनकी स्थिति को कुछ अलग तरह से पेश किया जाता है।
क्या क़ुरान और सुन्नत में कोई प्रमाण है कि पैगंबर ﷺ ने सहाबा को मावलिद मनाने का आदेश दिया था?
मावलिद अपने आप में एक उद्देश्य नहीं है। इसका उद्देश्य अल्लाह के रसूल ﷺ के इस दुनिया में आने की खुशी व्यक्त करना है। और खुशी जाहिर करना सिर्फ शरीयत की नज़र से वैध कार्य नहीं है, बल्कि यह हर मुसलमान पर एक फर्ज़ है।